जैसी तेरे चेहरे पर मुस्कान नज़र आती है
वैसी तो पागलपन के दौरान नज़र आती है
ख़ुद को ये नज़दीक से इतनी मुश्किल दिखलाती है
दुनिया दूर से उतनी ही आसान नज़र आती है
तेरी ओर से ज़ीस्त मेरी जितनी सुलझी लगती है
मेरी ओर से उतनी राएगान नज़र आती है
उसको देख समझ नइँ पाया हूँ अबतक वो क्या है?
वो हैवान सरी हो के भगवान नज़र आती है।
मेरे जिस्म में इतने सारे घाव बसे हैं साहिर,
मेरी परछाई इक रौशनदान नज़र आती है।
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