jaisi tere chehre par muskaan nazar aati hai | जैसी तेरे चेहरे पर मुस्कान नज़र आती है

  - Saahir

जैसी तेरे चेहरे पर मुस्कान नज़र आती है
वैसी तो पागलपन के दौरान नज़र आती है

ख़ुद को ये नज़दीक से इतनी मुश्किल दिखलाती है
दुनिया दूर से उतनी ही आसान नज़र आती है

तेरी ओर से ज़ीस्त मेरी जितनी सुलझी लगती है
मेरी ओर से उतनी राएगान नज़र आती है

उसको देख समझ नइँ पाया हूँ अबतक वो क्या है?
वो हैवान सरी हो के भगवान नज़र आती है।

मेरे जिस्म में इतने सारे घाव बसे हैं साहिर,
मेरी परछाई इक रौशनदान नज़र आती है।

  - Saahir

Zindagi Shayari

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