gham-e-duniya se jo takraar karta hooñ to karta hooñ | ग़म-ए-दुनिया से जो तकरार करता हूँ तो करता हूँ

  - Rohit tewatia 'Ishq'

ग़म-ए-दुनिया से जो तकरार करता हूँ तो करता हूँ
भले फिर राह हो दुश्वार करता हूँ तो करता हूँ

दिल-ए-दीवार पर यूँँ तो बहुत तस्वीर हैं तेरी
पर अब तन्हाई का दीदार करता हूँ तो करता हूँ

तमाशा क्यूँ बना कर रख दिया मेरी मोहब्बत का
अगर मैं कह रहा हूँ प्यार करता हूँ तो करता हूँ

मुझे ये भी पता है फूल नइँ लेगी वो फिर भी मैं
गली महबूब की गुलज़ार करता हूँ तो करता हूँ

किसी के हुस्न का मुझपर कोई जादू नहीं चलता
हसीनाओं का फ़न बेकार करता हूँ तो करता हूँ

मुझे मालूम है इस 'इश्क़ का अंजाम क्या होगा
मगर अब क्या करूँँ सरकार करता हूँ तो करता हूँ

  - Rohit tewatia 'Ishq'

Raasta Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Rohit tewatia 'Ishq'

As you were reading Shayari by Rohit tewatia 'Ishq'

Similar Writers

our suggestion based on Rohit tewatia 'Ishq'

Similar Moods

As you were reading Raasta Shayari Shayari