ghut ghut ke bhi jeena yahaañ dushwaar bahut hai | घुट घुट के भी जीना यहाँ दुश्वार बहुत है

  - Rohit tewatia 'Ishq'

घुट घुट के भी जीना यहाँ दुश्वार बहुत है
ये दिल तेरी चाहत का तलबगार बहुत है

ख़ुश ही मुझे करना है तो सीने से लगा लो
ग़म खींचने को आपका दीदार बहुत है

वो और हैं जिनको है बस इक़रार की चाहत
हम ऐसे दिवानों को तो इंकार बहुत है

घर की अगर इज़्ज़त रहे घर पर तो ही अच्छा
बाज़ार की चीजों को भी बाज़ार बहुत है

आओ मेरी बाहों में कि दुनिया को भुला दो
दुनिया के लिए आपका बीमार बहुत है

नफ़रत जो कभी बढ़ने लगे जंग है जायज़
फिर 'इश्क़ को तो एक ही ललकार बहुत है

  - Rohit tewatia 'Ishq'

Nafrat Shayari

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