जहाँ भर से बग़ावत की गई थी
वो इक लड़की ज़रूरत की गई थी
उसी ने ही सिखाया हद में रहना
जिसे बेहद मोहब्बत की गई थी
कभी ये सोचती हो या नहीं तुम
तुम्हारी जाँ इबादत की गई थी
तुम्हें इन कंगनों की चाह कैसी
खनक तुमको अमानत की गई थी
हमीं थे उन के दीवाने हमीं को
रुलाने तक की ग़फ़लत की गई थी
इन आँखों का हमेशा ख़्वाब थी वो
प ख़्वाबों में हक़ीक़त की गई थी
कभी उठते थे दोनों हाथ उसको
कभी पीरों से मिन्नत की गई थी
सभी उसको क़यामत कह रहे हैं
मगर किसकी बदौलत की गई थी
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