वो जिसपे मरने को तैयार हो तुम
उसी इक शख़्स को दुश्वार हो तुम
कोई देखे तो बस आँखों से झलके
वही सब सेे बड़ा असरार हो तुम
किसी से डरती हो तब हो तिजोरी
नहीं डरती तो फिर तलवार हो तुम
ये दुख है एक की ही हो सकोगी
न जाने कितनो का ग़मख़्वार हो तुम
तुम्हारे बिन कहानी ख़त्म हो क्या
कहानी का बस इक किरदार हो तुम
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