जिन्हें अब तक मसीहा कर रहे हैं
वही ज़ख़्मों को गहरा कर रहे हैं
बचाने का दिखावा हो रहा है
किनारे से इशारा कर रहे हैं
तो मेरी इज़्तराबी राएगाँ है
मुझी से आप पर्दा कर रहे हैं
तेरा महताब मद्धम पड़ गया है
मेरे जुगनू उजाला कर रहे हैं
हटा कर ज़ुल्फ़ यूँ चेहरे से बोले
ये देखो हम सवेरा कर रहे हैं
— Salman Yusuf















