chaand taaron ka intizaam kiya | चाँद तारों का इंतिज़ाम किया

  - Saqlain Mushtaque

चाँद तारों का इंतिज़ाम किया
तुझ सेे मिलने का एहतिमाम किया

इस सेे बढ़कर मैं और क्या करता
दिल जो मेरा था तेरे नाम किया

पारसा बन‌ के जब भी आया वो
जाम-ओ-मीना का इंतिज़ाम किया

सुब्ह होते ही हो गया रुख़्सत
जिसने शब भर यहाँ क़याम किया

तिश्नगी रक्खी हर घड़ी महदूद
मैंने दरिया का एहतिराम किया

ताकि वो मुझ पे भी तवज्जोह दे
मैंने झुक कर उसे सलाम किया

वो जो मुश्ताक़ पुर-ख़ुलूस न था
मैंने ख़ारिज तेरा पयाम किया

  - Saqlain Mushtaque

Subah Shayari

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