सारे रस्ते बना के देखे हैं
रिश्ते सब आज़मा के देखे हैं
कोई उम्मीद पर नहीं उतरा
वक़्त पर सब बुला के देखे हैं
नर्म लहजा तो मर चुका है यहाँ
सारे रिश्ते अना के देखे हैं
प्यार के दीप जल रहे मन में
बुझते नइँ हैं बुझा के देखे हैं
इश्क़ की ये हवा तो ज़ालिम है
मैं ने तेवर हवा के देखे हैं
— Saurabh Chauhan 'Kohinoor'















