ढलता सूरज रोता है
कौन किसी का होता है
कोई साथ नहीं देता
ख़ुद को लड़ना होता है
उस की याद सताती है
कहता कहता रोता है
बेचैनी सी रहती है
इश्क़ में ऐसा होता है
ऐसी बातें नहीं करो
मुझ को कुछ कुछ होता है
पैसा पैसा करता जो
वो रिश्तों को खोता है
मजबूरी में बाप कभी
रातों को नइँ सोता है
— Saurabh Chauhan 'Kohinoor'















