टूटे दिल वाला अब किधर जाए
कोई इक हादसा गुज़र जाए
कोई लेना न देना मुझ को अब
उस की मर्ज़ी भले जिधर जाए
तेरी सूरत दिखी है प्याले में
पीने से अच्छा है बिखर जाए
मेरे हक़ में गवाही नइँ देना
उस से कहना कि वो मुकर जाए
एक मौक़ा तो मिलना वाजिब है
क्या पता वो भी फिर सुधर जाए
ये ज़माना तो ठोकरें देगा
डर है तो घर में ही ठहर जाए
ज़िंदगी रौशनी से भरनी गर
तो किताबों में ही बिसर जाए
— Saurabh Chauhan 'Kohinoor'















