"आज कल"
अजीब वहशत है दिल में आज कल
लग रहा है इश्क़ का असर रायगाँ जा रहा है
उस पर तेरी यादें भी कम है आज कल
उदासी में बैठा रहा मैं सारी रात
कोई वजह न बता पाना सारी बात
उदासी को दिल में दफ़न करना यही बची है मोहब्बत आज कल
तमाम कोशिश तुझ को न सोचने की अजीब हालत है दिमाग़ की आज कल
सोच कर सोता हूँ हर रात मैं मौत आनी है बस आज कल आज कल
— Shadab khan















