गुमरही ठीक नहीं राह पे आओ लोगों
दुश्मनी ख़त्म करो हाथ मिलाओ लोगों
देख लेना ये तआस्सुब तुम्हें ले डूबेगा
ज़िंदा रहना है तो नफ़रत को मिटाओ लोगों
हिन्द में चारों तरफ़ बिखरे मुहब्बत का गुलाल
कभी ऐसी भी कोई होली मनाओ लोगों
ये अँधेरे से अँधेरे का सफ़र क्या मआ'नी
अक़्ल रखते हो तो अब शमा' जलाओ लोगों
कहते हैं सोने की चिड़िआ था कभी अपना वतन
क्या हुआ कैसे लुटा कुछ तो बताओ लोगों
आओ कुछ देर सुनें महर-ओ- वफ़ा की बातें
'रेख़्ता' मर्दे क़लन्दर को बुलाओ लोगों
— Rekhta Pataulvi















