adnaa sa paighaam hai meraa sabhi ke vaaste | अदना सा पैग़ाम है मेरा सभी के वास्ते

  - Shajar Abbas

अदना सा पैग़ाम है मेरा सभी के वास्ते
ज़िंदगी होती नहीं है ख़ुदकुशी के वास्ते

शे'र लिखने बैठता हूँ ऐसा लगता है मुझे
जैसे मैं पैदा हुआ हूँ शायरी के वास्ते

ज़िंदगी इक क़ीमती तोहफ़ा बस ये सोचकर
ज़िंदगी मैंने लुटा दी ज़िंदगी के वास्ते

क़ैस ये हर रोज़ समझाता है आकर ख़्वाब में
'इश्क़ अच्छी शय नहीं है हर किसी के वास्ते

जब अँधेरा 'इश्क़ की बस्ती में हर सू हो गया
हमने तब दिल को जलाया रौशनी के वास्ते

सोचता हूँ जब कभी दिल रोने लगता है शजर
मैंने कितने ग़म उठाए इक ख़ुशी के वास्ते

  - Shajar Abbas

Life Shayari

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