agar dil men mohabbat hai to izhaar-e-mohabbat kar | अगर दिल में मोहब्बत है तो इज़हार-ए-मोहब्बत कर

  - Shajar Abbas

अगर दिल में मोहब्बत है तो इज़हार-ए-मोहब्बत कर
नहीं करना तो मैं कर दूँ तू इक़रार-ए-मोहब्बत कर

मुहाफ़िज़ बन मेरी आँखों के ख़्वाबों का मुहाफ़िज़ बन
मिरा हमराज़ बन ख़ुद को अलमदार-ए-मोहब्बत कर

बचा ले हुस्न की तक़लीद से मुझको तू मेरे दिल
ख़ुदारा इल्तिजा सुन ले मत इसरार-ए-मोहब्बत कर

तरस खा ख़स्ता-हाली पर तरस खा ग़म के मारे पर
सितम ऐसे न मुझ पर ऐ सितमगार-ए-मोहब्बत कर

शजर महफ़ूज़ रहना चाहता है गर तू सहरा से
तो ले ले होश के नाख़ून इन्कार-ए-मोहब्बत कर

  - Shajar Abbas

Udasi Shayari

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