agar hamse mohabbat men sharaarat ho gaii to phir | अगर हमसे मोहब्बत में शरारत हो गई तो फिर

  - Shajar Abbas

अगर हमसे मोहब्बत में शरारत हो गई तो फिर
हमें गर रोज़ मिलने की ये आदत हो गई तो फिर

अभी हम साथ हैं इक दूसरे के ख़ुश हैं हर लम्हा
अगर कल दरमियाँ में अपने फुर्क़त हो गई तो फिर

मोहब्बत तुम इबादत की तरह करते हो कसरत से
मोहब्बत में अगर मुझसे सियासत हो गई तो फिर

तुम्हारे ख़्वाब सब मेरी इन आँखों में अमानत हैं
बताओ गर अमानत में ख़यानत हो गई तो फिर

मैं तुमसे दोस्ती कर लूँगी लेकिन दोस्ती के बाद
अगर मुझको शजर तुमसे मोहब्बत हो गई तो फिर

  - Shajar Abbas

I love you Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shajar Abbas

As you were reading Shayari by Shajar Abbas

Similar Writers

our suggestion based on Shajar Abbas

Similar Moods

As you were reading I love you Shayari Shayari