बैठे हुए हैं कब से मुसलसल उदास हम
साहिल हमारे पास में साहिल के पास हम
जा-ए-नमाज़-ए-इश्क़ पे दिल ज़ख़्मी हो गया
नौहा-कुनाँ हैं ओढ़ के ग़म का लिबास हम
दिल आब-ए-इश्क़ माँग के सहरा में मर गया
दिल की नहीं बुझा सके अफ़सोस प्यास हम
मत जाइए पकड़ के ये दामन को आपके
करते रहेंगे वक़्त-ए-सफ़र इल्तिमास हम
पढ़ पढ़ के दीनियात-ए-मोहब्बत को रात दिन
होते हैं मिस्ल-ए-क़ैस शजर बद-हवास हम
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