do chaar dil nahin hain nahin hain hazaar dil | दो चार दिल नहीं हैं नहीं हैं हज़ार दिल

  - Shajar Abbas

दो चार दिल नहीं हैं नहीं हैं हज़ार दिल
इस हुस्न पर फ़िदा हैं तिरे बे शुमार दिल

कैसे क़रार पाए भला बे क़रार दिल
लेता है सिर्फ़ नाम तिरा बार बार दिल

ये हुस्न वाले हुस्न पे अपने नज़र करें
करने लगा है हुस्न को अब दर किनार दिल

पलकें बिछा के बरसों से उलफ़त की राह पर
करता है सुब्ह-ओ-शाम तिरा इंतिज़ार दिल

फ़रहाद की तरह तो कभी क़ैस की तरह
होता फिरे है हुस्न की बस्ती में ख़्वार दिल

  - Shajar Abbas

Nazar Shayari

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