ham KHud ko chale aa.e hain lekar tire dar par | हम ख़ुद को चले आए हैं लेकर तिरे दर पर

  - Shajar Abbas

हम ख़ुद को चले आए हैं लेकर तिरे दर पर
तू हुस्न की तलवार चला आँखों के सर पर

ये जिस्म से उठने नहीं पाएगी अज़िय्यत
ग़म रख दिये जाएँगे अगर दिल की कमर पर

दामन को किया चाक लहू आँखों से रोए
जब 'इश्क़ के मक़तल में लगी बरछी जिगर पर

यूँँ तख़्त मुहब्बत का मयस्सर नहीं होगा
घर छोड़ के फ़रहाद सा निकलोगे सफ़र पर

अहसास नहीं है मिरी बर्बादी का उनको
जो कहते थे हम जान लुटा देंगे शजर पर

  - Shajar Abbas

Kamar Shayari

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