khat use bhej ke paighaam ye pahunch | ख़त उसे भेज के पैग़ाम ये पहुँचाना है

  - Shajar Abbas

ख़त उसे भेज के पैग़ाम ये पहुँचाना है
तेरे जाने से मेरे शहर में वीराना है

लाम से लफ़्ज़ सुनो ये से यहाँ होता है
बे से अब बाद शुरू करके अलिफ़ लाना है

दिल के जज़्बात हुआ करते हैं शे'रों में बयाँ
शायरी का भी ये फ़न यार कमाल आना है
'इश्क़ में कोई वफ़ादार नहीं हो सकता
'इश्क़ करके मियाँ मैंने तो यही जाना है

मैं फ़क़त तन्हा नहीं उसका दीवाना यारों
जिसने देखा है उसे उसका वो दीवाना है

मजलिस-ए-हिज्र बपा रहती है इस
में हरदम
दिल मेरा दिल नहीं यादों का अज़ाख़ाना है

सामने मौलवी साहब के सुनो लफ़्ज़-ए-क़ुबूल
आपको तीन दफ़ा बैठ के दोहराना है

जब से देखा है सुनो दिल से ये आती है सदा
आपको पाना है बस पाना है बस पाना है

बिन मोहब्बत के नहीं कुछ भी ज़माने में शजर
उससे मिलना है उसे मिलके ये समझाना है

  - Shajar Abbas

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