ख़्वाब-ए-नाज़ में मेरी वो जो रोज़ आते हैं
रु-ब-रु वो आने में मेरे हिचकिचाते हैं
मौत हमसे डरती है और देखिए साहिब
हमको ये जहाँ वाले मौत से डराते हैं
मसअला यही है बस दर्द-ओ-ग़म सुनाने में
दर्द-ओ-ग़म मेरा सुनकर लोग मुस्कुराते हैं
बा ख़ुदा इन आँखों में इस क़दर उदासी है
ख़्वाब इन
में आते में बेजा खौ़फ़ खाते हैं
जो क़रीब होते हैं क़ल्ब के शजर ज़ैदी
सबसे पहले सच ये है वो ही दिल दुखाते हैं
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