किसी को ख़्वाब में सहरा दिखाई देता है
किसी को ख़्वाब में दरिया दिखाई देता है
सुनो जो आपको चेहरा दिखाई देता है
हमें वो चाँद का टुकड़ा दिखाई देता है
वहाँ पा देखिए कुछ दूर यारों सहरा में
जनाब-ए-क़ैस का ख़ेमा दिखाई देता है
हमारी नज़रों से देखो तुम अपने गाल का तिल
मता-ए-जान ये गहना दिखाई देता है
ख़ुदा का शुक्र अदा करता हूँ मैं कसरत से
जब उसके सर पा दुपट्टा दिखाई देता है
मैं जब भी देखता हूँ हाथ की लकीरों को
तुम्हारा नाम नविशता दिखाई देता है
इलाही ख़ैर हो उन सारे नौ जवानों की
जिन्हें भी ख़्वाब में सहरा दिखाई देता है
क़सम ख़ुदा की मेरी जान तेरे कूचे में
मुझे जिनाँ का नज़ारा दिखाई देता है
मैं अपना दर्द सुनाता हूँ शे'र में लिखकर
मगर ये सब को लतीफा दिखाई देता है
ज़माना कहता है हालत को देखकर मेरी
ये शख़्स 'इश्क़ का मारा दिखाई देता है
हमारी आँखों को क्या हो गया है जानें 'शजर'
हर एक शख़्स फ़रिश्ता दिखाई देता है
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