mila hai tohfe men zakham-e-jigar bareli men | मिला है तोहफ़े में ज़ख़्म-ए-जीगर बरेली में

  - Shajar Abbas

मिला है तोहफ़े में ज़ख़्म-ए-जीगर बरेली में
उजड़ गया है मोहब्बत का घर बरेली में

दुआ में आया हमारी असर बरेली में
शजर पे आया वफ़ा का समर बरेली में

किया बहिश्त की हूरों का दीद आँखों ने
जहाँ जहाँ भी गई ये नज़र बरेली में

सुकून-ओ-चैन मयस्सर न हो सका हमको
भटकते फिरते थे हम दर-ब-दर बरेली में

हमें यक़ीन है इसका कि हमको शाम-ओ-सहर
किसी की ढूँढती होगी नज़र बरेली में

वहाँ की आब-ओ-हवा ख़ुल्द की सी लगती थी
बड़ा सुकून मिला था शजर बरेली में

  - Shajar Abbas

Aankhein Shayari

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