shor hai saare nagar men phool kaliyaan le gaya | शोर है सारे नगर में फूल कलियाँ ले गया

  - Shajar Abbas

शोर है सारे नगर में फूल कलियाँ ले गया
बाग़बाँ का लूटकर कोई गुलिस्ताँ ले गया

ख़ाक सहरा में उड़ाता फिर रहा है क़ैस क्यूँ
क्या हुआ तुझको जो तू ख़ुद को बयाबाँ ले गया

जब सुकून-ए-दिल नहीं बज़्म-ए-तरब में मिल सका
ख़ुद को मैं फिर जानिब-ए-मुल्क-ए-ख़मोशाँ ले गया

दिल में मैंने अपने जिस अफ़राद को दी थी अमाँ
लूटकर वो मेरे दिल की सारी ख़ुशियाँ ले गया

एड़ियाँ रगड़ो शजर तुम शिद्दत-ए-गिर्या करो
जाने वाला ख़ुद को लो शहर-ए-ख़मोशाँ ले गया

  - Shajar Abbas

Phool Shayari

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