teergii hijr ki ab dil se mita de koi | तीरगी हिज्र की अब दिल से मिटा दे कोई

  - Shajar Abbas

तीरगी हिज्र की अब दिल से मिटा दे कोई
'इश्क़ का दीप यहाँ आ के जला दे कोई

ख़्वाब आँखों को मुहब्बत का दिखा दे कोई
मेरे होठों पे तबस्सुम को सजा दे कोई

सो गया थक के मुहब्बत का मुसाफ़िर देखो
नींद से उसको ज़रा जा के जगा दे कोई

ख़्वाब में उजड़ा हुआ देखा है मैंने गुलशन
मुझको इस ख़्वाब की ताबीर बता दे कोई

अब शजर कुछ भी नहीं ग़म के सिवा देने को
अब मिरे यार बता तुझको कि क्या दे कोई

  - Shajar Abbas

Muskurahat Shayari

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