उस चेहरे की अब हमको ज़ियारत नहीं होती
यूँँ सूरा-ए-यूसुफ़ की तिलावत नहीं होती
ऐ दिल तुझे गर 'इश्क़ की चाहत नहीं होती
तो आज मेरी क़ैस सी हालत नहीं होती
नफ़रत वो भला हमसे बता ख़ाक करेगा
जिस शख़्स से खुलकर के मोहब्बत नहीं होती
औलाद से ख़िदमत की वो करता है तवक़्क़ो
जिस शख़्स से माँ बाप की ख़िदमत नहीं होती
ये हाल बना डाला है फ़ुर्क़त ने तुम्हारी
अब हम को अँधेरो से भी वहशत नहीं होती
दुनिया में फ़क़त एक से होती है मोहब्बत
हर शख़्स से दुनिया में मोहब्बत नहीं होती
ले जाओ मेरे पास से तुम ख़्वाबों को अपने
अब आँखों से ख़्वाबों की हिफ़ाज़त नहीं होती
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