'उम्र भर मुझको रहेगा ये मेरे यार मलाल
कर नहीं पाया मोहब्बत का मैं इज़हार मलाल
हाकिम-ए-वक़्त ने क़ातिल को लिखाया मक़तूल
इस तरह शाया हुए मुल्क में अख़बार मलाल
दुश्मन-ए-जान अक़ी का हुआ दुनिया में अक़ी
हो गई दरमियाँ आँगन के लो दीवार मलाल
देखकर साहिब-ए-किरदार तुझे दिल ने कहा
ऐसे होते हैं भला साहिब-ए-किरदार मलाल
मुझसे ये कहने लगे मिस्र के सब अहल-ए-नज़र
हुस्न-ए-यूसुफ़ है शजर बर-सर-ए-बाज़ार मलाल
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