ye aur baat ke ham thoda kam udaas rahe | ये और बात के हम थोड़ा कम उदास रहे

  - Shajar Abbas

ये और बात के हम थोड़ा कम उदास रहे
बिछड़के आपसे लेकिन सनम उदास रहे

उठाए 'इश्क़ में रंज-ओ-अलम उदास रहे
तमाम 'उम्र ख़ुदा की क़सम उदास रहे

ये तय हुआ था बिछड़ कर उदास रहना है
तो अपना वा'दा निभा कर के हम उदास रहे

बिछड़ते वक़्त जो ग़म आपने दिए थे हमें
हमारे साथ में वो सारे ग़म उदास रहे

हमारा चाक गिरेबान देखने वाले
शजर ज़माने के सब ज़ी हशम उदास रहे

  - Shajar Abbas

Dard Shayari

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