"दुआ"
मुझ से मुहब्बत करने वाले
तेरे हक़ में महव-ए-दुआ हूँ
तुझ को किसी शे का न अलम हो
आँख तेरी ता उम्र न नम हो
तेरे नाज़ुक होंठ हमेशा
राज करें मुस्कान के दिल पर
मेरी रब से ये ही दुआ है
ख़ुशियाँ तुझ पर जान लुटाएँ
रंज-ओ-अलम से दूर रहे तू
तेरे हक़ में महव-ए-दुआ हूँ
मेरी रब से ये ही दुआ है
— Shajar Abbas















