"तसव्वुर में"

आप को मुबारक हो और बहुत मुबारक हो
आप के तसव्वुर में खोए खोए रहते हैं
गुनगुनाते रहते हैं मुस्कुराते रहते हैं
आप को मुबारक हो और बहुत मुबारक हो
सुब्ह शाम जान-ए-मन आप के तसव्वुर में
बैठ कर गुलिस्ताँ में ग़ज़लें लिखते रहते हैं
शे'र कहते रहते हैं नज़्में लिखते रहते हैं
आप को मुबारक हो और बहुत मुबारक हो
आप के तसव्वुर में खोए खोए रहते हैं
इस नए तरीक़े से आन बान लिखते हैं
इब्तिदा में काग़ज़ पर लफ़्ज़-ए-जान लिखते हैं
संदलीं बदन को हम दो जहान लिखते हैं
गुलसितान लिखते हैं आसमान लिखते हैं
इस तरह से ज़ुल्फ़ों पे तब्सिरा करे हैं हम
ज़ुल्फ़-ए-अम्बरीं हर पल ज़ुल्फ़ को लिखे हैं हम
इन हसीन अबरू को आबशार लिखते हैं
बे शुमार लिखते हैं बार बार लिखते हैं
इस तरह से आँखों की दास्ताँ लिखे हैं हम
आप की दो आँखों को कहकशाँ लिखे हैं हम
यूँ नफ़ीस होंठों को जान-ए-जाँ लिखे हैं हम
पत्तियाँ लिखे हैं हम तितलियाँ लिखे हैं हम
जब नया तसव्वुर में कोई बाब लिखते हैं
इस हसीन चेहरे को माहताब लिखते हैं
आप को मुबारक हो और बहुत मुबारक हो
आप के तसव्वुर में खोए खोए रहते हैं
गुनगुनाते रहते हैं मुस्कुराते रहते हैं
आप को मुबारक हो और बहुत मुबारक हो

— Shajar Abbas

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