जब अर्श से ये आई सदा 'इश्क़ ज़िंदाबाद
हर ज़र्रा ज़र्रा बोल उठा 'इश्क़ ज़िंदाबाद
है शोर कू-ब-कू ये मचा 'इश्क़ ज़िंदाबाद
तू भी ये नारा साथ लगा 'इश्क़ ज़िंदाबाद
मैंने जो बढ़के आगे कहा 'इश्क़ ज़िंदाबाद
सारा ज़माना बोल उठा 'इश्क़ ज़िंदाबाद
ये 'इश्क़ ज़िंदाबाद रहेगा हाँ ज़िंदाबाद
था 'इश्क़ ज़िंदाबाद है जा 'इश्क़ ज़िंदाबाद
लैला से बोला सदक़ा दो इस नौजवान का
जब क़ैस ने ये मुझसे सुना 'इश्क़ ज़िंदाबाद
पत्थर से मुझको अहल-ए-सितम मारते रहे
मैं मुस्कुरा के कहता रहा 'इश्क़ ज़िंदाबाद
मैंने लबों से चूम के सीने लगा लिया
काग़ज़ पे गर कहीं भी दिखा 'इश्क़ ज़िंदाबाद
महफ़िल के सामईन सभी झूमने लगे
जब जब भी मैंने मिसरा पढ़ा 'इश्क़ ज़िंदाबाद
मेराज इतनी कर दी अता इसको क़ैस ने
हर शख़्स को ये कहना पड़ा 'इश्क़ ज़िंदाबाद
जो हैं मुख़ालिफ़ 'इश्क़ के दिल उनके काँप उठें
क़ुव्वत के साथ बोलो ज़रा 'इश्क़ ज़िंदाबाद
शम्स-ओ-क़मर ज़मीन-ओ-ज़माँ कहकशाँ शजर
फूलों ने पत्तियों ने कहा 'इश्क़ ज़िंदाबाद
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