वफ़ा ओ इश्क़ के मैदान से निकालूँगामैं ख़ुद को हाल-ए-परेशान से निकालूँगामैं तेरी डोली की तरह तेरी बिदाई के दिनजनाज़ा अपना बड़ी शान से निकालूँगा— Shajar Abbas