दस्तूर प्यास का है बदलता तलाश में
प्यासा तलाश में कभी दरिया तलाश में
इस बार दास्ताँ में नया मोड़ देखिए
सय्याद की लगा है परिंदा तलाश में
जिस की ज़बाँ पे नाम न मंज़िल का हो यहाँ
ऐसे ही राहगीर की रस्ता तलाश में
इक उम्र जुस्तजू-ए-सुकूँ में गुज़ार दी
सारा सुकून हम ने गँवाया तलाश में
दुनिया में छिप गया है जो दुनिया बिगाड़ के
उस शख़्स की लगी है ये दुनिया तलाश में
— Dipanshu Shams















