ग़मों का एक दफ़्तर देख लेना
यक़ीनन मेरे अंदर देख लेना
तुम्हें ईंटों पे ग़म चिपके मिलेंगे
कोई वीरान सा घर देख लेना
जो तन्हा एक पैकर देखना हो
हमें ही तुम बराबर देख लेना
किसी दिन सूख जाएगा यक़ीनन
हमारे दुख का सागर देख लेना
तेरे एहसास की गर्मी मिलेगी
मेरे तन-मन को छू कर देख लेना
तुम्हें पीछे से हम आवाज़ देंगे
अगर चाहो तो मुड़ कर देख लेना
— Shekhar Mandal















