ab farq nahin jab padna to gussaau kyun | अब फ़र्क़ नहीं जब पड़ना तो गुस्साऊँ क्यूँ

  - SHIV SAFAR

अब फ़र्क़ नहीं जब पड़ना तो गुस्साऊँ क्यूँ
है प्यार नहीं तो नफ़रत भी मैं जताऊँ क्यूँ

अब जब कोई भी न रिश्ता तुमको रखना है
तो दोस्त ही क्या फिर दुश्मन भी कहलाऊँ क्यूँ

जब ग़ैर समझ बैठे तो करना बहस ही क्या
अब तुझ सेे झगड़ के अपनापन मैं दिखाऊँ क्यूँ

अब जब बेबाक गले तुम मुझ सेे मिलते हो
तो मैं इक बोसा लेने में शर्माऊँ क्यूँ

जब तर्क–ए–मोहब्बत का ही तुमने ठान लिया
तो तुम से बिछड़ने में इतना घबराऊँ क्यूँ

तूने तो मेरे रूप में हीरा खोया है
फिर तेरे बदले मैं आख़िर पछताऊँ क्यूँ

  - SHIV SAFAR

Nafrat Shayari

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