abhii tak hooñ main zinda tu kahii barham nahin hai naki teri yaad men rona ye meraa kam nahin hai na | अभी तक हूँ मैं ज़िन्दा तू कहीं बरहम नहीं है ना

  - SHIV SAFAR

अभी तक हूँ मैं ज़िन्दा तू कहीं बरहम नहीं है ना
कि तेरी याद में रोना ये मेरा कम नहीं है ना

तेरी ख़ुशियों की ख़ातिर 'उम्र भर रोता रहूँ लेकिन
नहीं है साथ तू तो ज़िंदगी में ग़म नहीं है ना

तुम्हारे घर से कोसों दूर गर बरकत लगे रहने
तो पहले देख लेना माँ की आँखें नम नहीं है ना

हकीमों से कोई पूछे मेरा दम घुट रहा है क्यूँँ
जो दिल पर मल रहे हैं ये कहीं मरहम नहीं है ना

ये दिल का घाव ही तो आख़िरी उसकी निशानी है
इसे भी ख़त्म कर दूंगा कि अब हम, हम नहीं है ना

  - SHIV SAFAR

Chehra Shayari

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