vo tu hai ya teri machalti jawaani | वो तू है या तेरी मचलती जवानी

  - SHIV SAFAR

वो तू है या तेरी मचलती जवानी
जिसे देख दिल ये हुआ पानी पानी

उठी तेरी नज़रें है मिसरा-ए-ऊला
झुकी जो नज़र तो है मिसरा-ए-सानी

ये मेरी ग़ज़ल तुम सँभालो या फेंको
मेरी बस यही आख़िरी है निशानी

लिखा होता मिलना तो मिलते भी कैसे
था मैं एक राजा थी तू एक रानी

कोई मेरा था जो मेरा हो न पाया
इसी इक सतर में है मेरी कहानी

शुरू हो गया फिर ‘सफ़र’ आँसुओं का
मिली जब मुझे एक चिट्ठी पुरानी

  - SHIV SAFAR

Shaheed Shayari

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