छिपाए राज़ हैं जितने बता दूँ
तेरे जैसों को पर कैसे बता दूँ
बने बैठे हो अब ग़ैरों में अच्छे
हो कितने अस्ल में अच्छे बता दूँ
उजालों में भी खो जाएगा दिन के
जो तेरे रात के क़िस्से बता दूँ
मुहब्बत से डरेंगी सात पुश्तें
जो तुम को इश्क़ के माने बता दूँ
लिपट के साथ तुम भी रो पड़ोगे
‘सफ़र’ के ज़ख़्म गर गिनके बता दूँ
— SHIV SAFAR















