meraa aangan bhi mahak jaayega gulshan banke | मेरा आँगन भी महक जाएगा गुलशन बनके

  - SHIV SAFAR

मेरा आँगन भी महक जाएगा गुलशन बनके
मेरे घर आएगी जिस रोज़ तू दुल्हन बनके

मेरे रग रग में लहू बनके तू बहती जाए
और सीने में तेरे धड़कूं मैं धड़कन बनके

हमको इक दूजे से बांधेगी जो नन्ही सी जान
ज़िंदगी में वो मेरी आएगी बचपन बनके

वो नज़र मुझको न आए तो लगेगी बढ़ने
मेरी सांसें मेरे सीने में ही उलझन बनके

कल को कंधे के बराबर वो मेरे आएगी
जो कभी पीठ पे सो जाएगी छुटकन बनके

बेटे की तरह बुढ़ापे में हमारी बेटी
अपनी पलकों पे रखेगी हमें सरवन बनके

सुन मेरी जान मैं जिस रोज चला जाऊंगा
फिर तेरे हाथों से टूटूंगा मैं कंगन बनके

मुझ सेे पहले ही अगर दुनिया जो तूने छोड़ा
तो मैं रह जाऊंगा इक सूना सा आंगन बनके

  - SHIV SAFAR

Life Shayari

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