बिखरना ही तब मुझको सच्चा लगा था
कि जब उसके सीने से मैं जा लगा था
मेरे पास आया था जब हिज़्र करने
वो पहली दफ़ा मुझको अपना लगा था
मैं जब टूटने की ही था कश्मकश में
सॅंभालेगा वो मुझको ऐसा लगा था
उसे छोड़कर जब मेरे पास आया
बिछड़ना ही तब मुझको अच्छा लगा था
तुम्हारी तरह ही था जब मैं भी बदला
तो सच सच बताओ कि कैसा लगा था
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