usii ko aaj kal meri khushi achchhii nahin lagti | उसी को आज कल मेरी ख़ुशी अच्छी नहीं लगती

  - SHIV SAFAR

उसी को आज कल मेरी ख़ुशी अच्छी नहीं लगती
जो कहता था कि आँखों में नमी अच्छी नहीं लगती

जले हाथों से माँ ने यूँँ ग़रीबी में खिलाए थे
कि अब रोटी में घी मक्खन लगी अच्छी नहीं लगती

मेरी इस ज़िंदगी से मेरा बिल्कुल ऐसा रिश्ता है
कि जिस सेे प्यार है मुझको वही अच्छी नहीं लगती

मैं अब जिसके भी आँखों में मुहब्बत देख लेता हूॅं
न जाने क्यूँँ मुझे वो फिर कभी अच्छी नहीं लगती

ज़मीं की एक लड़की ने मेरा दिल जबसे तोड़ा है
मुझे अब आसमानों की परी अच्छी नहीं लगती

  - SHIV SAFAR

Jashn Shayari

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