zindagi men tum abhii dard hi kya dekhe ho | ज़िंदगी में तुम अभी दर्द ही क्या देखे हो

  - SHIV SAFAR

ज़िंदगी में तुम अभी दर्द ही क्या देखे हो
गर न तुम अपनी मुहब्बत की क़ज़ा देखे हो

प्यार में लड़के ने दी जाँ ये ख़बर बनके मैं
कल के अख़बार में लिपटा हुआ था देखे हो?

दिल ही टूटा है कोई ऐसी बड़ी चीज़ नहीं
अब मुहब्बत में कभी मिलते वफ़ा देखे हो?

मैंने माना कि जहाँ देखा है तुमने लेकिन
उसकी आँखों को न देखा है तो क्या देखे हो

फ़िक्र मा'शूक़ा की ख़ुशियों की तुम्हें रहती है
माँ की आँखों में छिपे दर्द भला देखे हो?

सब लुटा के भी न मिल पाई तो रोना कैसा
'इश्क़ में अब किसी को होते नफ़ा देखे हो?

रात दिन सिर्फ़ मुबाइल में ही रहने वालों
चाँदनी रात कभी बाद-ए-सबा देखे हो?

कौन कहता है दु'आएँ नहीं होती हैं क़ुबूल
ग़ैर के वास्ते क्या करके दु'आ देखे हो?

  - SHIV SAFAR

Mehboob Shayari

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