zaraa si naukri paane ki khaatir mar raha hooñ main | ज़रा सी नौकरी पाने की ख़ातिर मर रहा हूँ मैं

  - Shoonya Shrey

ज़रा सी नौकरी पाने की ख़ातिर मर रहा हूँ मैं
गणित का हूँ मैं लड़का और बीए कर रहा हूँ मैं

कभी लड़की नहीं छेड़ी नहीं फबती कसी उस पर
इन्हीं बातों से माँ की आँख में ऊपर रहा हूँ मैं

रखा है हाथ हाथों पर औ' उसकी हाँ‌ भी है लेकिन
उसे सीने से चिपकाने में थोड़ा डर रहा हूँ मैं

रहा अव्वल पढ़ाई में मेरे हर यार से 'शून्या'
मगर चर्चों में उल्फ़त के ज़रा कमतर रहा हूँ मैं

  - Shoonya Shrey

Mazdoor Shayari

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