निकले जो ढूँढ़ने थे उन्हें कब ख़ुदा मिला
मैं इस लिए ही कहता हूँ दिल से दुआ मिला
चुप-चाप चाहनें से नहीं मिलता इश्क़ यार
मुझ से है इश्क़ गर तो हवा में सदा मिला
तू छोड़ के गया था मुझें अच्छे के लिए
दुख है कि जो मिला तुझे वो भी बुरा मिला
— SIDDHARTH SHARMA















