दस्तरस में तो मेरे था सब कुछ
पर गवारा नहीं किया सब कुछ
हश्र का दिन अभी सलामत है
जानता है मेरा ख़ुदा सब कुछ
कुछ मेरे पास था नहीं लेकिन
उस ने माँगा तो दे दिया सब कुछ
भूल से याद कर लिया उस को
फिर मुझे याद आ गया सब कुछ
जल रहा था चराग़ की सूरत
बुझ गया दिल तो बुझ गया सब कुछ
— Sumit Panchal















