दुनिया में बस प्यारे चमक रहे होंगे
हम तो जैसे तैसे चमक रहे होंगे
ख़ल्वत में सिगरटें जला दी होंगी और
मीलों दूर अंधेरे चमक रहे होंगे
दरिया क्या इक दिन मुँह लगा गया होगा
उस पत्थर के किनारे चमक रहे होंगे
इस राएगाँ सफ़र में हम को है पिंदार
कि अपने ख़ूँ से रस्ते चमक रहे होंगे
दौलत-मंद की दौलत पोशीदा होगी
और मुफ़लिस के सिक्के चमक रहे होंगे
बनने सँवरने की अपनी होगी ये उम्र
और हम हैं कि बिखर के चमक रहे होंगे
— khamakhaah















