गिर रहा हूँ और बुलंदी पर नज़र है
मैं वो तिनका जिस की कश्ती पर नज़र है
सादगी सीरत इनायत कौन देखे
जान-ए-जाँ मेरी जवानी पर नज़र है
फूल को मुझ से छुपाता है छुपा फिर
बाग़बाँ मेरी तो तितली पर नज़र है
हड़बड़ाती तेरी आँखें कह रही हैं
अब परिंदे की शिकारी पर नज़र है
हाल अब ऐसा है तेरे जाने के बा'द
कान चौखट पर है खिड़की पर नज़र है
ऐन मौक़े' पर बदल ली चाल उस ने
देखा जब प्यादे की रानी पर नज़र है
बन रही है ख़ूब अच्छी घर की तस्वीर
मेरी पंखे और रस्सी पर नज़र है
— khamakhaah















