मुश्किल रस्तों में से धूल उड़ेगी
कितने छालों में से धूल उड़ेगी
सोया है जो ख़ुदा हज़ारों सालों
उठा तो पलकों में से धूल उड़ेगी
जब गुज़रेगा दीवाने का जनाज़ा
आप की राहों में से धूल उड़ेगी
थकन मुसाफ़िर की इक रात कभी ओढ़
तेरे ख़्वाबों में से धूल उड़ेगी
कीलो के घर में क्यूँ हवा बुला दी
अब दीवारों में से धूल उड़ेगी
क़ैदी उधर छुपे हैं ऐ तीर-अंदाज़
जिधर के पेड़ों में से धूल उड़ेगी
आज का दिन गर अँगड़ाई का दिन है
तो ज़ंजीरों में से धूल उड़ेगी
आज समुंदर प्यास बुझाएगा तो
कितनी लहरों में से धूल उड़ेगी
तेरी आँखों में जो मैं धूल झोंकूँ
मेरी आँखों में से धूल उड़ेगी















