" चमड़े की बेल्ट "
जी सर आप को क्या चाहिए बताओ
मुझ को ऐसी भैंस की चमड़े की बेल्ट चाहिए
जिस की पीठ में धूप फिसल के
मानो ऐसा रंग खिलाती थी
जैसे कि चाँदनी रंग-ए-शब चूम रही हो
जिस की पूँछ हमेशा मटकती चटकती थी
गाती थी नाचती थी पैहम
मौज-ए-हवा की सोहबत में
जिस की इक दुश्मन थी
कम्बख़्त एक चिड़िया जो हरदम
करवट मार के पीठ में बैठी रहती थी
जो भैंस अपनी सींगो में से
रगड़-रगड़ के धूल उड़ाती थी
जो इतनी बेग़ैरत थी
नाज़ुक-ओ-कमसिन से सुर्ख़ हाथ के मानिंद
हर किसी को अपना थन छूने देती थी
जिस के ऊपर बच्चे चढ़के
यम हूँ मैं यम हूँ मैं
कहते रहते थे
जो दिन-भर मुँह से ग़ुब्बारे बनाती थी
जो पानी के चार घड़े पी जाती थी
जो पूरी रात रोज़ दूध बनाती थी
बता किसी ऐसी भैंस का तिरे पास
चमड़े की बेल्ट है क्या
दुकान पर ऐसी बेल्ट
तो कब की हाथों हाथ बिक चुकी है
सॉरी सर सारी ख़त्म हो चुकी हैं















