तेरी हर अदा है दिलकश तेरा हुस्न दिलरुबा है
तुझे जब से मैं ने देखा मुझे इश्क़ हो गया है
पड़े तुझ पे कोई मुश्किल तो मुझे पुकार लेना
मेरी जान तुझ पे दिल क्या मेरी जान भी फ़िदा है
रहे इश्क़ में किसी की मुझे अब नहीं ज़रूरत
तेरा साथ चाहता था तेरा साथ मिल गया है
कोई और अक्स इस
में कभी रू नुमा न होगा
तेरे आइने से बेहतर मेरे दिल का आइना है
तुझे याद करते करते मैं ये सोचता हूँ अक्सर
तेरा हिज्र भी न हो तो मेरे पास और क्या है
मेरे जज़्बा-ए-दिली कि जो सदा समझ न आए
उसे मोतबर समझिए जो क़लम ने लिख दिया है
रहे बेख़ुदी पे तलहा कोई दूर तक नहीं है
मेरा अक्स ही मुसलसल मेरे साथ चल रहा है















