अब तक किसी का इश्क़ मुकम्मल नहीं हुआ
ये मसअला वो है जो अभी हल नहीं हुआ
कहने को इश्क़ करते हैं दुनिया में सब मगर
आशिक़ वो क्या जो इश्क़ में पागल नहीं हुआ
हैरान हूँ मैं ऐसे दुपट्टे को देख कर
अब तक तुम्हारे सर का जो आँचल नहीं हुआ
दो पल की ज़िंदगी का बताऊँ मैं लुत्फ़ क्या
जब तेरा मेरा साथ ही दो पल नहीं हुआ
क्यूँ हो किसी के आँख से बहने का ग़म मुझे
मैं तो किसी की आँख का काजल नहीं हुआ
तलहा मैं लखनऊ का उन्हें कैसे मान लूँ
जिन के सुख़न का लहजा ही मख़मल नहीं हुआ
— Talha Lakhnavi















